Moral Hindi story for Kids 2022 – 20 Moral stories for Kids

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Moral Hindi story for Kids 2022

Moral Hindi story for Kids 2022

कहानियां सुनना किसे पसंद नहीं होता है। आजकल बच्चे हो या बड़े हो हर किसी को कहानियां पढ़ना और सुनना बहुत पसंद आता है। बच्चों को कहानियां पढ़ने से उनमें नई प्रेरणा आती है और कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है। अगर कहानियां मनोरंजक हो तो बच्चे उसे बहुत मन लगाकर पढ़ाते हैं और अंत में उन्हें कुछ ना कुछ जरूर सीखने को मिलता है।

पहले के दिनों में दादा-दादी और नाना-नानी कहानियां सुनाया करते थे जो बहुत ही मनोरंजक हुआ करती थी और अंत में हुआ हमें कुछ ऐसी बातें बताते थे जो हमारे लिए बहुत ज्ञानवर्धक होता था। लेकिन आजकल टेक्नॉलॉजी बढ़ने के साथ-साथ अब कहानियों को भी ऑनलाइन पढ़ा जा सकता है।

Short Hindi stories for Kids

अगर आप भी कहानियां पढ़ने के शौकीन हैं तो आज की इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे कहानियां बताने जा रहे हैं जिन्हें पढ़कर आपको बहुत मनोरंजन होगा और इससे आपको बहुत कुछ सीखने को भी मिलेगा।

1 – मूर्ख गधा

एक बार की बात है जब एक बारी प्रतिदिन नमक बेचने बाजार जाया करता था और इसके लिए अपनी गधे की पीठ पर नमक की थैली याद कर बाजार ले जाया करता था। बाजार जाते समय रास्ते में एक नदी भी मिलती थी जिससे उन्हें पार करना पड़ता था।

 प्रतिदिन की तरह एक दिन वह अपने गधे की पीठ पर नमक लाने नदी पार कर रहा था इसी दौरान अचानक गधा फिसल गया और नमक की थैली के साथ पानी में गिर गया। नमक पानी में गिरने के कारण पानी में घुल गया और गधे की पीठ पर भार बहुत कम हो गया।

अपनी पीठ पर वजन कम होता देख कर गधा बहुत खुश हुआ। अब गधा प्रतिदिन जानबूझकर पानी में फिसल जाया करता था जिसके कारण नमक पानी में गिर जाते थे और व्यापारी को बहुत नुकसान उठाना पड़ता था।

 काफी दिनों तक नुकसान उठाने के बाद में पारी समझ गया कि गधा चालाक हो गया है और यह जानबूझकर ऐसा करता है। 

अपने गधे को सबक सिखाने के लिए व्यापारी ने अगले दिन उसकी पीठ पररुई लाद दिया। प्रतिदिन की तरह इस दिन भी गधे नहीं जानबूझकर पानी में फिसल गया और उसने सोचा कि आज भी वजन कम हो जाएगा लेकिन रुई पानी में भीगने के कारण उसका वजन और भी ज्यादा बढ़ गया  और गधे को एक सबक मिल गई।

उस दिन के बाद गधे ने पानी में गिरना बंद कर दिया और व्यापारी बहुत खुश हुआ।

 इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि हमें जानबूझकर कोई गलत काम नहीं करना चाहिए और हमेशा कोई भी काम करने से पहले दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए।

2 – शेर और चूहा

एक जंगल में एक शेर रहता था और उस जंगल में अन्य बहुत सारे जीव रहते थे। एक बार की बात है जब शेर जंगल में सो रहा था और उस समय एक चूहा शेर की पीठ पर उछल कूद करने लगा। चूहे के उछल कूद करने के कारण शेर की नींद खराब हो गई और वह गुस्से में आग बबूला हो गया।

शेर ने गुस्से में आकर चूहे को खाने के लिए दौड़ा लेकिन चूहा नहीं शेर की विनती की कि वह उसे छोड़ दें वह आगे से ऐसी गलती नहीं करेगा और शेर को अगर किसी मदद की जरूरत पड़ेगी तो वह उसकी मदद करेगा। इस पर शेर को बहुत हंसी आई लेकिन उसने चूहे को जाने दिया।

एक बार उसी जंगल में कुछ शिकारी शिकार कर रहे थे और उन्होंने शेर को अपने जाल में फंसा लिया। शेर को जाल में फंसाने के बाद शिकारी ने उसे वहीं पेड़ से बांध दिया। शेर ने बहुत प्रयास किया कि वह छूट जाए लेकिन थक हार कर वह बैठ गया। इसके बाद गुस्से में आकर वह जोर-जोर से दहाड़ने लगा।

  जिस समय से दहाड़ रहा था उसी समय वह चूहा उन से गुजर रहा था और उसने शेर की दहाड़ सुनकर शेर की और आया और उससे पूछा कि आपको क्या तकलीफ हुई। शेर ने अपनी कहानी सुनाई उसके बाद चूहा नहीं शेर की मदद करने की सोची और अपने तेज दातों से उस जाल को उतरने लगा। कुछ समय के बाद चूहे ने जान को कुतर दिया और से आजाद हो गया। आजाद होते हैं शेर ने चूहे को धन्यवाद दिया और दोनों जंगल की ओर चले गए।

 शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि उदार मन से किया गया कार्य में सफल देता है।

3 – लोमड़ी और खट्टे अंगूर

एक बार की बात है जब एक जंगल में एक लोमड़ी रहा करती थी। एक दिन वह लोमड़ी बहुत भूखी थी और वह खाने की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। उसने जंगल में कई घंटों तक खाने की तलाश में इधर-उधर भटकती रहेगी लेकिन उसे कोई भी ऐसा चीज नहीं मिला जिसे वह खा सके।

 खाने की तलाश में धीरे-धीरे हुआ है जंगल से बाहर चली गई और एक किसान के घर तक पहुंच गई। वहां उसने देखा कि किसान के घर की दीवार पर रसीले अंगूरों का गुच्छा लटका हुआ है। वह अंगूर बहुत ही मीठे और आकर्षक दिखाई दे रहे थे। अब लोमड़ी के मुंह में पानी आ गया और वह अंगूर खाने का प्रयास करने लगे।

 क्योंकि अंगूर का गुच्छा दीवार पर बहुत ऊंचा था इसीलिए लोमड़ी को बार-बार हवा में छलांग लगानी पड़ रही थी। वह जब भी हवा में छलांग लगा दी थी तब अपना मुंह खोलते थी ताकि उसके मुंह में गुरु का गुच्छा आ जाए लेकिन दीवारें ऊंची होने के कारण उसके सारे प्रयास असफल हो गए।

 बहुत कोशिश करने के बाद जब हुआ अंगूर खाने में असफल रही तब उसने सोचा कि अब उसे वापस जंगल चले जाना चाहिए। जाते-जाते वह अपने मन में ही गुदगुदा रही थी कि मुझे अंगूर नहीं मिला तो क्या हुआ वैसे भी अंगूर खट्टे थे।

4 – सारस और लोमड़ी

 एक जंगल में एक लोमड़ी और एक सारस रहा करते थे। दोनों में बहुत घनिष्ठ मित्रता थी इसी कारण एक दिन लोमड़ी ने  सारस को भोजन के लिए निमंत्रण दिया जिसे सुनकर सारस बहुत खुश हुआ। सारस खाने का बहुत शौकीन था इसीलिए उसने निमंत्रण स्वीकार कर लिया और शाम को लोमड़ी के घर पहुंची। घर पहुंच कर भारत ने लोमड़ी के घर का दरवाजा खटखटाया और लोमड़ी ने दरवाजा खोला।

लोमड़ी उसे प्यार से बुला कर अंदर ले गई और दोनों भोजन करने के लिए मेज पर बैठ गए। लोमड़ी ने उस दिन भोजन में सूप बनाया था और उस सूप को उसने एक कटोरे में भरोसा जो बहुत उथला था। सारस को भोजन करने में बहुत समस्या आई और वह थोड़ा सा ही भोजन कर पाया लेकिन लोमड़ी ने पूरा भोजन कुछ ही समय में समाप्त कर दिया।

 उस समय सारस को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने अपना गुस्सा प्रकट नहीं किया और विनम्रता पूर्वक अपने घर चला आया। लोमड़ी को सबक सिखाने के लिए सारस ने लोमड़ी को भी अपने घर भोजन के लिए निमंत्रण दिया।

अगले दिन शाम को लोमड़ी खुशी-खुशी सारस के घर पहुंची और दोनों भोजन करने के लिए मेज पर बैठ गए।  पारस ने लोमड़ी के लिए भी सूप बनाया था और उसने इस सूप को दो लंबे संकरे फूलदानों में परोसा।इस बार लोमड़ी की गर्दन छोटी होने के कारण हुआ मात्र थोड़ा सा ही भोजन कर पाई और सारस ने पूरा भोजन कुछ ही समय में समाप्त कर दिया।

 भोजन करने के बाद जब लोमड़ी अपने घर जाने लगी तब उसने रास्ते में सोचा कि हमें किसी के साथ गलत नहीं करना चाहिए क्योंकि गलत करने से फल भी बुरा मिलता है।

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