Rail Engine kaise kam karta hai – Train Engine ki jankari

1
93
ट्रेन
ट्रेन

Rail Engine kaise kam karta hai

दोस्तों आपने कभी ना कभी ट्रेन में जरूर सफर किया होगा। ट्रेन से सफर करना बहुत सुहावना और आरामदायक होता है। हम भारत के एक कोने से दूसरे कोने पर कुछ घंटों में ही पहुंच जाते हैं। अक्सर जब आप ट्रेन में सफर करते होंगे तब गौर करते होंगे कि ट्रेन का इंजन कैसे काम करता है और सिर्फ एक इंजन कैसे इतनी सारी ट्रेन के डिब्बों को कितनी तेजी से खींच लेता है।

आज हम ट्रेन के इंजन के बारे में बात करेंगे की ट्रेन का इंजन कैसे काम करता है और ट्रेन के इंजन में कौन सी तकनीक प्रयोग की जाती है। इन सभी जानकारियों को अच्छी तरह से समझने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

अगर भारतीय रेलवे की बात करें तो इसकी शुरुआत 1853 में हुई थी उस समय ट्रेन के इंजन को भाप की शक्ति से चलाया जाता था उसके बाद धीरे-धीरे कोयला से चलने वाले इंजन को विकसित किया गया। वर्तमान में ट्रेन के इंजन दो तरह के होते हैं पहला डीजल इंजन और दूसरा इलेक्ट्रिक इंजन। आजकल भारत में वातावरण और डीजल पेट्रोल की कमी को देखते हुए रेलवे को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक किया जा रहा है और रेलवे फैक्ट्री में भी ज्यादातर इलेक्ट्रिक इंजन को ही विकसित किया जा रहा है।

ट्रेन इंजन के प्रकार

ट्रेन इंजन दो प्रकार के होते हैं

  • Diesel Engine
  • Electric Engine

डीजल इंजन

 वर्तमान में ट्रेन का इंजन दो प्रकार का होता है पहला डीजल इंजन होता है जिसे चलाने के लिए उसमें बहुत सारे डीजल की आवश्यकता होती है और डीजल के सहारे ट्रेन के जनरेटर को चलाया जाता है जिससे विद्युत उत्पन्न होती है और उससे ट्रेन इंजन को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। आजकल डीजल इंजन उन क्षेत्रों में चलाया जाता है जहां पर इलेक्ट्रिक बोल उपलब्ध नहीं है और जो छेत्र दूरदराज के इलाकों में होता है उन जगहों पर डीजल इंजन का प्रयोग किया जाता है। आजकल डीजल पेट्रोल की अभाव और वातावरण प्रदूषण के कारण ज्यादातर डीजल इंजन को बंद किया जा रहा है और इसकी जगह इलेक्ट्रिक इंजन को विकसित किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक इंजन

वर्तमान में ज्यादातर इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि इससे डीजल और पेट्रोल के महंगे दामों से छुटकारा मिल गया है और इलेक्ट्रिक इंजन में हम भारत में ही बनी हुई इलेक्ट्रिक ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसके कारण ट्रेन इंजन को चलाने में लागत कम हो जाती है। वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक इंजन के द्वारा प्रदूषण को कम किया जा सकता है क्योंकि डीजल इंजन से बहुत सारा दूंगा निकलता है जिसके कारण बहुत अधिक वायु प्रदूषण होता है वही इलेक्ट्रिक इंजन में किसी प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ नहीं निकलता है जिसके कारण वायु प्रदूषण भी नहीं होता है।

भारत में इलेक्ट्रिक इंजन की शुरुआत सन 1925 में हुई थी जिसके बाद इलेक्ट्रिक इंजन में लगातार विकास किया गया और आज हमारे देश में ज्यादातर इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल किया जाता है।

वर्तमान में भारत में इलेक्ट्रिक इंजन का पैटर्न मोटर एसी या डीसी करंट पर चलता है। इसके लिए कुछ कुछ दूरी पर इलेक्ट्रिक और लगाए जाते हैं जहां से इलेक्ट्रिक ट्रेन में लगे हैं पैंटोग्राफ के द्वारा एसी करंट लिया जाता है और इंजन में उसे डीसी करंट में बदलकर ट्रेक्शन मोटर तक पहुंचाया जाता है की मदद से ट्रेन आगे बढ़ता है। पहले  चलने वाले इलेक्ट्रिक इंजन जैसे WAP4, WAG7, WAG5 डायरेक्ट करंट पर काम करते हैं जबकि नए इलेक्ट्रिक इंजन जैसे WAG9, WAP7  के ट्रेक्शन मोटर 3 फेज अल्टरनेटिंग करंट पर काम करते हैं।

ट्रेन इंजन कैसे काम करता है?

अब हम आपको बताते हैं कि ट्रेन का इंजन कैसे काम करता है। जहां तक डीजल इंजन की बात है तो डीजल इंजन में शक्तिशाली जनरेटर लगा होता है जिसे चलाने के लिए बहुत सारे डीजल की आवश्यकता होती है और उसके लिए  इंजन में बहुत बड़ा डीजल टैंक लगा होता है जिसमें डीजल को भरा जाता है और वहां से डीजल जनरेटर तक पहुंचता है।

इस डीजल द्वारा जनरेटर को चलाया जाता है और विद्युत उत्पन्न किया जाता है और उस विद्युत को  इंजन के पहिए में लगे ट्रेक्शन मोटर तक पहुंचाया जाता है जिससे ट्रेन को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। ज्यादातर डीजल इंजन को हर समय चालू रखा जाता है क्योंकि डीजल इंजन को एक बार स्टार्ट करने में बहुत सारे डीजल की आवश्यकता होती है।

वहीं अगर इलेक्ट्रिक इंजन की बात करें तो इलेक्ट्रिक इंजन में किसी तरह का डीजल या पेट्रोल टैंक नहीं लगा होता है बल्कि इसमें इंजन के ऊपर एक पैंटोग्राफ लगा होता है और उस पैंटोग्राफ के द्वारा विद्युत ऊर्जा को लोकोमोटिव तक पहुंचाया जाता है। विद्युत ऊर्जा से चलने के लिए कुछ कुछ दूरी पर इलेक्ट्रिक पोल लगे होते हैं जिनमें 25000 वोल्ट का करंट होता है क्योंकि एक ट्रेन इंजन को चलने के लिए बहुत ज्यादा करंट की जरूरत होती है।

एक इलेक्ट्रिक इंजन में बहुत सारा सेमीकंडक्टर और ट्रांसफार्मर लगा होता है जिसमें पैंटोग्राफ द्वारा बिजली एकत्रित किया जाता है जिसे सर्किट ब्रेकर से होते हुए लोकोमोटिव में मौजूद एक  ट्रांसफार्मर तक पहुंचाया जाता है जो करंट को नियंत्रित करता है।

सबसे पहले ट्रांसफार्मर से पैंटोग्राफ द्वारा लाई गई ऊर्जा को मुख्य रेक्टिफायर में स्थानांतरित किया जाता है जिसे डीसी करंट में बदला जाता है। यदि इलेक्ट्रिक इंजन डायरेक्ट करंट पर काम करता है तो उसे यहां से वह जमीन जाती है लेकिन अगर लोकोमोटिव थ्री फेज एसी करंट पर काम करता है तो उसे मुख्य और सहायक इनवर्टर को तीन चरण प्रत्यावर्ती धारा में बदला जाता है।

इलेक्ट्रिक इंजन में लगे ट्रांसफार्मर और रेक्टिफायर बहुत ज्यादा गर्म हो जाते हैं और उन्हें अच्छे से चलाने के लिए ठंडा करना पड़ता है इसके लिए वहां पर बहुत सारे कूलिंग फैन लगे होते हैं जिसकी मदद से ट्रांसफार्मर हो रेक्टिफायर को ठंडा किया जाता है।

यह भी पढ़ें – अग्निपथ योजना की जानकारी

Conclusion

इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि कैसे काम करता है हम आशा करते हैं कि आप हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा अगर आपको इस घटना से संबंधित कोई प्रश्न पूछना हो या कुछ जानना चाहते हैं तो हमें तभी पूछ सकते हैं।

FAQ

Q. 1 – भारत में ट्रेन की शुरुआत कब हुई थी?

Ans. – भारत में ट्रेन की शुरुआत सन 1853 में हुई थी जो मुंबई से थाने के बीच ली थी। वहीं अगर इलेक्ट्रिक ट्रेन की बात की जाए तो इसकी शुरुआत भारत में सन 1925 में हुई थी।

Q.2 –  डीजल इंजन में लगे टंकी में कितना डीजल भरा जा सकता है?

Ans. – भारत में बने डीजल इंजन में लगे टंकी में लगभग 5000 लीटर से लेकर 6000 लीटर तक डीजल एक बार में भरा जा सकता है।

Q.3 – भारत में डीजल इंजन कितना माइलेज देती है?

Ans. – भारत में चलने वाले डीजल इंजन का माइलेज लगभग 4 लीटर प्रति किलो मीटर होती है यह माइलेज 12 दिनों तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के लिए है अगर ट्रेन में 20 या उससे अधिक कोच लगे हैं तो वह इंजन 6 लीटर प्रति किलोमीटर माइलेज देती है।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here