Rocket kaise Kam karta hai – Rocket Science ki best jankari

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राकेट
राकेट

Rocket kaise kam karta hai

दोस्तों आपने कभी ना कभी आसमान में रॉकेट को जाते हुए जरूर देखा होगा। जब किसी स्थान से रॉकेट गुजरता है तो  रॉकेट से बहुत सारा धुआं निकलता है और गर्म गैस निकलती है। जिसके कारण रॉकेट के लांच होने और दूर तक जाने के बाद भी उसका धुआं एक लकीर की तरह दिखाई देता है। अक्सर आपने जब बचपन में या कभी आसमान में रॉकेट को देखा होगा तो आपके मन में ही है जरूर लालसा आती होगी कि रॉकेट क्या होता है और यह कैसे काम करता है और रॉकेट का क्या काम है।

अगर आप भी रॉकेट के बारे में जानना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर है क्योंकि आज हम रॉकेट के बारे में आपको पूरी जानकारी देने वाले हैं। इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि रॉकेट की खोज कब हुई और यह कैसे काम करता है।

Rocket Kya hota hai

Rocket kaise kam karta hai

दोस्तों रॉकेट एक ऐसा अंतरिक्ष यान है जिसके द्वारा धरती से विभिन्न प्रकार के उपकरण और सेटेलाइट ओ को अंतरिक्ष में भेजने के काम आता है। रॉकेट न्यूटन के तीसरे नियम की गति के आधार पर काम करता है।

रॉकेट शब्द की उत्पत्ति इटालियन शब्द “Rocchetta” से हुई है इस शब्द का मतलब होता है कि ऐसा सिलेंडर नुमा वस्तु जिस पर धागे लपेटे जाते हैं। रॉकेट का आकार सिलेंडर जैसा होता है यह बहुत तीव्र गति से अपनी उलटी दिशा में जलते हुए विभिन्न प्रकार के गैसों के अपशिष्ट को छोड़ता है जिसके कारण उसमें संवेग उत्पन्न होता है और उसे आगे बढ़ने में मदद मिलती है।

रॉकेट का आविष्कार सबसे पहले चीन में 13वीं शताब्दी में ही शुरू हुआ था। शुरुआत में रॉकेट का इस्तेमाल अस्त्र-शस्त्र के तौर पर किया जाता था। पहली बार सन 1232 में मंगोलों और चीनी के बीच हुए युद्ध में रॉकेट का इस्तेमाल किया गया था।

आधुनिक रॉकेट का आविष्कार 19वीं शताब्दी में शुरू हुआ था। रॉकेट का इस्तेमाल सबसे ज्यादा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान किया गया था। इन युद्ध में रॉकेट मैं बम और बारूद लगाकर हथियारों के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। 

आजकल रॉकेट का इस्तेमाल बहुत सारे कार्य में किया जाता है जैसे मनुष्य को अंतरिक्ष में लाने ले जाने एवं मानव निर्मित सेटेलाइट ओं को अंतरिक्ष में स्थापित करने के लिए भी रॉकेट का इस्तेमाल किया जाता है। रॉकेट के इस्तेमाल द्वारा मनुष्य चांद पर जा चुका है और जल्द ही रॉकेट के इस्तेमाल से ही मनुष्य मंगल ग्रह की सैर करेगा।

रॉकेट के लॉन्च करने की प्रक्रिया

दोस्तों जैसा कि हमने आपको बताया है कि यह एक ऐसा नहीं याद है जिसकी मदद से मनुष्यों और सेटेलाइट ओं को अंतरिक्ष में भेजा जाता है। एक रॉकेट को लॉन्च करने की शुरुआत स्पेस सेंटर से होती है। अगर भारत की बात करें तो यहां ISRO  द्वारा रॉकेट लॉन्च किया जाता है एवं विश्व में रॉकेट लॉन्च करने का सबसे बड़ा स्पेस सेंटर NASA  है। इन स्पेस सेंटर से कई रॉकेट लॉन्च किए जा चुके हैं और आज भी कई प्रकार के रॉकेट लॉन्च किए जा रहे हैं।

जब रॉकेट के लांच करने की शुरुआत की जाती है तब रॉकेट में इतनी मात्रा में इंधन भरी जाती है कि यह आसानी से अपने केंद्र तक पहुंच जाए इसके बाद जब अंतरिक्ष के बाहर रॉकेट पहुंचता है तब इस में लगे हुए सभी पार्ट्स ऑटोमेटिक अलग हो जाते हैं।

अगर आपको लग रहा होगा कि अगर रॉकेट में इंधन खत्म हो जाए तो क्या होगा तो आपको बता दें कि रॉकेट में शक्तिशाली सोलर पैनल लगे होते हैं जो सौर ऊर्जा की मदद से बिजली पैदा करते हैं और उसकी मदद से रॉकेट काम करता है।

यह भी पढ़ें – रेल इंजन कैसे काम करता है

रॉकेट हवाई जहाज से कैसे अलग है

हवाई जहाज और रॉकेट में यह अंतर होता है कि हवाई जहाज सिर्फ धरती के वायुमंडल में ही उड़ता है इसका कारण है कि इसे ईंधन को जलाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। लेकिन अगर रॉकेट की बात की जाए तो यह धरती के वायुमंडल में उड़ने के साथ अंतरिक्ष में भी उड़ सकता है। रॉकेट अपने साथ ही धन को जलाने के लिए जरूरी ऑक्सिडाइजर को साथ लेकर उड़ता है जिसके कारण रॉकेट को बाहर से ऑक्सीजन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है और यह कहीं भी और किसी भी ऊंचाई पर उड़ सकता है।

रॉकेट ईंधन कितने प्रकार के होते हैं?

रॉकेट में इस्तेमाल होने वाला ईंधन और अन्य वाहनों के ईंधन से अलग होता है जिस तरह से हमारे आसपास चलने वाली गाड़ियों में डीजल पेट्रोल या केरोसिन तेल का इस्तेमाल किया जाता है ठीक इसी प्रकार रॉकेट में भी एक खास तरह का इंधन उपयोग किया जाता है। रॉकेट के ईंधन को प्रणोदक कहा जाता है।जब प्रणोदक जलता है तो इससे आमीन धन से कई गुना अधिक उर्जा उत्पन्न होती है। रॉकेट ईंधन यानी प्रणोदक 2 प्रकार के होते हैं।

रॉकेट ईंधन या प्रणोदक के प्रकार

  1. ठोस प्रणोदक –  रॉकेट ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ठोस प्रणोदक में ठोस अब कारक और ठोस ऑक्सीकारक का मिश्रण होता है। इसमें विभिन्न प्रकार के हाइड्रोजन तथा क्लोरेट,  नाइट्रेट या पर्कलोरेट जैसे ऑक्सीकारक होते हैं।
  2.  द्रव प्रणोदक – इस प्रणोदक में द्रव इंधन का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें अल्कोहल द्रव हाइड्रोजन केरोसिन द्रव अमोनिया और हाइड्रोजन शामिल होता है।

रॉकेट क्षेत्र में भारत का योगदान

हम सभी जानते हैं कि भारत एक ऐसा देश है जिसके पास कभी रॉकेट लॉन्च करने के कोई भी संसाधन उपलब्ध नहीं थे।  हम सभी जानते हैं कि जब भारत में पहला रॉकेट लॉन्च किया जाना था तब रॉकेट को साइकिल पर लाया गया था और लॉन्चिंग पैड तक एक बैलगाड़ी पर लादकर पहुंचाया गया था। इस तरह भारत में पहला रॉकेट लॉन्च किया गया था। लेकिन वर्तमान में हमारा देश रॉकेट क्षेत्र में बहुत ऊंचाई तक पहुंच चुका है और मंगलयान और चंद्रयान का सफर भी कर चुका है।

 हमारे देश में ISRO यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन द्वारा रॉकेट लॉन्च किया जाता है। इसकी स्थापना सन 1969 में वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने की थी। भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत सन 1962 में ही हो चुकी थी। भारत का पहला रॉकेट 21 नवंबर 1963 को केरल के एक छोटे से गांव “थुंबा” में लांच किया गया था।

निष्कर्ष

आज हमने आपको रॉकेट के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध करवाई है। इस आर्टिकल में बताया गया है कि एक रॉकेट कैसे काम करता है और यह अंतरिक्ष में कैसे जाता है इसके अलावा रॉकेट में किस प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको रॉकेट के बारे में और ज्यादा जानना है या कुछ पूछना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

FAQ

  • रॉकेट की खोज कब हुई थी?

रॉकेट का आविष्कार 12 वीं शताब्दी में चीन में हुआ था। सन 1232 में मंगोलों और चीनी युद्ध में रॉकेट का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया गया था।

  • भारत के प्रमुख रॉकेट का नाम क्या है?

1 – अग्नि 6
2 – अग्नि 5
3 – अग्नि 4
4 – K 5
5 – K 4

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