Satellite Ki Puri jankari – Satellite kaise work karta hai

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Satellite ki puri jankari

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दोस्तों जब हम छोटे होते हैं या स्कूल में पढ़ते हैं तो हमें सेटेलाइट के बारे में सुनने को मिलता है। लेकिन उस समय हमें ज्यादा जानकारी नहीं होती है कि सेटेलाइट क्या होती है और इसके क्या कार्य होते हैं। आजकल बहुत कम लोगों को सेटेलाइट के बारे में जानकारी उपलब्ध है। आज की इस टेक्नोलॉजी दुनिया में सैटेलाइट का भी अहम रोल हो गया है। आजकल हम जितनी भी टेक्नॉलॉजी इस्तेमाल करते हैं जैसे रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फोन या कहीं आने जाने के लिए मैप का इस्तेमाल करते हैं तो यह भी सेटेलाइट की मदद से ही काम करता है।

शायद आप जानते होंगे कि भारत का पहला कृत्रिम सेटेलाइट यानी उपग्रह आर्यभट्ट है। इस उपग्रह को 19 अप्रैल 1975 में लांच किया गया था। इस उपग्रह को भारत के प्रक्षेपण स्थल इसरो द्वारा बनाया गया था लेकिन उस समय भारत में लॉन्च करने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण इसे रूस के स्पेस स्टेशन से लांच किया गया था।  आज की इस आर्टिकल में हम आपको सेटेलाइट के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं। आज किस आर्टिकल में हम बताएंगे कि सेटेलाइट क्या होता है और यह कैसे काम करता है साथ ही इसका इस्तेमाल किन क्षेत्रों में किया जाता है। इन सभी जानकारियों को अच्छी तरह से जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े।

Satellite Kya hoti hai

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 सेटेलाइट मानव द्वारा बनाई गई एक ऐसी वस्तु है जिसे बहुत सारे उपकरणों को और बहुत सारी टेक्नॉलॉजी के द्वारा निर्मित किया जाता है। यह सैटेलाइट एक निश्चित ऊंचाई पर पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं। आप जानते होंगे कि चांद हमारी पृथ्वी की परिक्रमा करता है और चांद को प्राकृतिक सेटेलाइट कहा जाता है क्योंकि यह मानव द्वारा निर्मित नहीं किया गया है। सैटेलाइट पृथ्वी के चक्कर लगाकर पृथ्वी पर हो रही गतिविधियों पर नजर रखता है आप ही आजकल सेटेलाइट के द्वारा बहुत सारे कार्य किए जा रहे हैं जैसे मोबाइल फोन, टेलीविजन, नेवीगेशन इत्यादि क्षेत्र में सेटेलाइट का बहुत अहम रोल हो गया है।

सेटेलाइट को संचालित करने के लिए उसमें बहुत सारे सोलर पैनल लगे होते हैं जिससे सैटेलाइट को संचालित करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। सेटेलाइट में बहुत सारे ट्रांसपोंडर और ट्रांसमीटर भी लगे होते हैं जिससे इनके द्वारा किसी सिग्नल को भेजने या रिसीव करने में मदद मिलती है।

इसके अलावा इन सेटेलाइट में बहुत सारे उपकरण और मोटर भी लगे होते हैं जिससे इन्हें पृथ्वी से हैं कंट्रोल किया जा सकता है और इन्हें किसी भी दिशा में डायवर्ट किया जा सकता है। आजकल अंतरिक्ष में दुनिया के हजारों सैटेलाइट परिक्रमा कर रहे  हैं। सेटेलाइट में बहुत सारे high-definition कैमरे भी लगे होते हैं जिससे हम पृथ्वी के किसी भी जगह को आसानी से देख सकते हैं इसके अलावा इन सेटेलाइट से इंटरनेट ऑफ कम्युनिकेशन क्षेत्र में भी बहुत मदद मिलती है।

सेटेलाइट के प्रकार

सैटेलाइट को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है जिनके अलग-अलग दूरी और अलग-अलग क्षेत्र होते हैं जिनके बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

1 – Low Orbit Satellite

इस तरह के सेटेलाइट हमारी पृथ्वी के सबसे पास होते हैं जिन का 150 किलोमीटर से लेकर 2000 किलोमीटर तक होता है। इन सेटेलाइट की गति बहुत ज्यादा होती है जिसके कारण यह एक दिन में ही पृथ्वी के कई चक्कर लगा लेते हैं। ऐसे सैटेलाइट का इस्तेमाल ज्यादातर पृथ्वी की इमेज लेने और स्कैनिंग करने के लिए किया जाता है।

2 – Medium Orbit Satellite

इन सैटेलाइट की गति ज्यादा तेज नहीं होती है। मीडियम ऑर्बिट के सेटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में 12 घंटे या इससे ज्यादा समय लेते हैं। इन सेटेलाइट की ऊंचाई लगभग 10000 किलोमीटर से लेकर 20000 किलोमीटर तक होती है और इन सैटेलाइट का उपयोग ज्यादातर नेविगेशन क्षेत्र में किया जाता है।

3 – High Orbit Satellite

इन सैटेलाइट का इस्तेमाल कम्युनिकेशन क्षेत्र में किया जाता है। इन सेटेलाइट की दूरी पृथ्वी से लगभग 36000 किलोमीटर होती है। यह उपग्रह पृथ्वी के समान दूरी से ही पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं।

 सैटेलाइट का कार्य

अब हम आपको बताते हैं कि सेटेलाइट के द्वारा क्या क्या कार्य किया जाता है और इनकी मदद से हमें कैसे सहायता मिलती है।

मौसम के क्षेत्र में

आजकल इन सेटेलाइट से हमें मौसम का पूर्वानुमान बहुत जल्द मिल जाता है। अगर कोई तूफान या चक्रवात आने वाला हो या किसी क्षेत्र में मानसून आने वाला हो तब हम इन सेटेलाइट की मदद से ही कुछ दिन पहले ही जान जाते हैं कि इन क्षेत्रों में मानसून या चक्रवात आने वाली है। मौसम के क्षेत्र में यह सेटेलाइट बहुत मददगार साबित होते हैं क्योंकि मौसम की भविष्यवाणी हो जाने से  हम पहले ही सावधान हो जाते हैं जिससे जानमाल का नुकसान नहीं होता है।

मिलिट्री और सेना के क्षेत्र में

इन सैटेलाइट का इस्तेमाल सेना और मिलिट्री भी करती है क्योंकि इनकी मदद से वह देश के बॉर्डर पर हो रही गतिविधियों और जासूसी कर सकते हैं। इन सेटेलाइट की मदद से मिलिट्री किसी खास जगह को स्कैनिंग भी कर सकती है जहां किसी दुश्मन के छुपे होने की जानकारी मिल जाती है साथ ही इन सेटेलाइट की मदद से सेना द्वारा ट्रैकिंग और सर्वेक्षण भी किया जाता है।

नेविगेशन क्षेत्र में

आजकल नेविगेशन के क्षेत्र में सेटेलाइट का बहुत अहम रोल हो गया है क्योंकि इसकी मदद से हम बिना किसी सहायता के दुनिया के किसी भी कोने में जा सकते हैं। इसके अलावा हम दुनिया के किसी भी जगह को नक्शे पर देख सकते हैं। नेविगेशन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आजकल वाहनों में किया जाता है। वाहनों में नेवीगेशन होने से हमें कहीं भी आने-जाने में कोई समस्या नहीं होती है। अगर हमें किसी जगह जाना है तो वहां का एड्रेस डालने के बाद हमें आसानी से उस जगह जाने में मदद मिल जाती है। इसके अलावा नेविगेशन का इस्तेमाल पुलिस द्वारा किसी मुजरिम या किसी व्यक्ति को लोकेट करने के लिए भी किया जाता है।

 टेलीविजन और टेलीकास्टिंग क्षेत्र में

आज के समय में टेलीविजन का इस्तेमाल सभी घरों में किया जाता है। इन टेलीविजन में हमें जो प्रोग्राम दिखाया जाता है वह सेटेलाइट की मदद से ही हमारे घरों तक पहुंचता है। इसके अलावा खेल जगत में भी अगर कोई टेलीकास्टिंग करनी है तो बहुत आसानी से हम दुनिया के किसी भी कोने में हो रहे खेल आयोजन या किसी अन्य आयोजन को अपने टीवी या कंप्यूटर में लाइव देख सकते हैं।

 निष्कर्ष

इस आर्टिकल की मदद से आज हमने जाना कि सेटेलाइट क्या होती है और यह कैसे काम करती है इसके अलावा हमें किन-किन क्षेत्रों में सेटेलाइट के द्वारा मदद मिलती है। हम आशा करते हैं कि आप सेटेलाइट के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर चुके होंगे। अगर आपको इस आर्टिकल से संबंधित कोई और प्रश्न पूछना हो या हमें राय देना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।

यह भी पढ़ें – राकेट कैसे काम करता है 

FAQ

Q. 1 – सैटेलाइट आसमान से नीचे क्यों नहीं गिरती है?

ans. – हम सभी जानते हैं कि कोई भी वस्तु पृथ्वी पर वापस तब आती है जब उस वस्तु की दूरी इतनी होती है कि वह गुरुत्वाकर्षण केंद्र के दायरे में हो। लेकिन सेटेलाइट अंतरिक्ष में इतनी दूरी पर होती है जहां पर गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता है इस वजह से सेटेलाइट आसमान में ही चक्कर लगाते रहते हैं।

Q. 2 – हाई ऑर्बिट सैटेलाइट कितनी ऊंचाई पर होते हैं?

ans. – हाई अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 36000 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं और इन सैटेलाइट का काम कम्युनिकेशन क्षेत्र में लिया जाता है। यह उपग्रह लगभग 24 घंटे में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करते हैं।

Q. 3 – सैटेलाइट को अंतरिक्ष में कैसे भेजा जाता है?

ans.सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए स्पेस सेंटर का मदद लिया जाता है जहां सैटेलाइट को रॉकेट के द्वारा लॉन्च किया जाता है और अंतरिक्ष में जाने पर रॉकेट सेटेलाइट से अलग हो जाते हैं और सैटेलाइट चक्कर लगाना शुरु कर देती है।

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